Friday, 13 July 2012

क्या पुणे में दिया जा रहा था अन्‍ना को धीमा जहर?


क्या पुणे में दिया जा रहा था अन्‍ना को धीमा जहर?


- अन्‍ना के इलाज पर उठे सवाल -
पुणे के अस्पताल में कई दिनों तक इलाज कराने के बावजूद हालत न सुधरने पर अन्ना हजारे जब गुड़गांव के मेदांता अस्पताल पहुंचे, तो दो ही दिन में उनकी स्थिति बेहतर हो गयी. अन्ना के इलाज पर जब सवाल उठे, तो डॉ संचेती के डॉक्टर बेटे ने गुड़गांव पहुंच कर उनसे मुलाकात की. इसके बाद अन्ना ने अपने हस्ताक्षर से बयान जारी कर कहा कि उनका ठीक इलाज चल रहा था.. आखि‍र क्यों अन्ना को जारी करना पड़ा इस तरह का बयान? पढ़ें यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..
क्या है अन्ना के पत्र में
मेरी सेहत को लेकर मीडिया में तरह-तरह की बातें की जा रही हैं. डॉ कांति लाल संचेती से मेरी 25 साल की दोस्ती है. ऐसा कहा जा रहा है कि जो दवा दी गयी, वो ज्यादा थी या उनकी जरूरत नहीं थी. मुझे ऐसा नहीं लगता कि मुझे दवाइयां गलत नीयत से दी गयी थी. शायद मेरा शरीर उन दवाइयों को बर्दाश्त नहीं कर पाया. मैं मानता हूं कि किसी की जिंदगी या सेहत भगवान के हाथ में होती है. डॉ संचेती को सरकार ने पद्मविभूषण दिया है. उनके इनाम को मेरी सेहत से जोड़ना गलत है. उनका इनाम उनकी 40 वर्षो की सेवाओं और समाज में उत्तम कार्यो के लिए दिया गया है. मैं उन्हें इसके लिए बधाई देता हूं.

क्या पुणे के संचेती अस्पताल में अन्ना हजारे को भविष्य में आंदोलन न कर पाने की स्थिति में लाने की तैयारी की जा रही थी? क्या राजनीतिक तौर पर संचेती अस्पताल को इस भरोसे में लिया गया कि अगर वह अन्ना हजारे को पांच राज्यों में चुनाव के दौरान मैदान में न उतरने देने की स्थिति ला सकता है, तो अस्पताल चलानेवालों का ख्याल रखा जायेगा ? क्या पुणे के एक व्यवसायी को भी राजनीतिक तौर पर इस भरोसे में लिया गया कि वह अन्ना से अपनी करीबी का लाभ कांग्रेस को पहंचाये, तो सरकार उसे भी इनाम देगी ? क्या अन्ना के सहयोगियों को भी सुविधाओं से इतना भर दिया गया कि वह भी अन्ना को उसी राजनीति के हाथ का खिलौना बना बैठें, जिस राजनीति के खिलाफ़ अन्ना संघर्ष कर रहे थे ? ये सारे सवाल अगर रालेगण सिद्धि से लेकर पुणे और मुबंई में अन्ना आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच घुमड़ रहे हैं, तो दिल्ली से सटे गुड़गांव के मेदांता अस्पताल से इसके जवाब भी निकलने लगे हैं.

यह सब कैसे और क्यों हुआ? इसे जानने से पहले यह जरूरी है कि इस खेल की एवज में पहली बार क्या-क्या हुआ, उसकी जानकारी ले लें. पहली बार अन्ना रालेगण के अपने सहयोगी के बिना ही दिल्ली इलाज के लिए पहंचे. पहली बार संचेती अस्पताल के कर्ताधर्ता कांति लाल संचेती को सीधे पद्म विभूषण से नवाज दिया गया. पहली बार अन्ना के करीबी पुणे के व्यवसायी अभय फ़िदौरिया के भाई काइनेटिक के चैयरमैन अरुण फ़िरदौरिया को पद्मश्री से नवाजा जायेगा. 74 बरस की उम्र के जीवन में पहली बार अन्ना ने यह महसूस किया कि संचेती अस्पताल में इलाज के दौरान उनसे खुद उठना बैठना नहीं हो पा रहा है. दरअसल पिछले दो दिनों से गुड़गांव के मेदांता में इलाज कराते अन्ना के शरीर से करीब तीन किलोग्राम पानी बाहर निकला है. और दो दिन के भीतर ही अन्ना अपना काम खुद कर सकने की स्थिति में आ गये हैं और आज ही ( मंगलवार) अन्ना को आइसीयू से सामान्य कमरे में शिफ्ट भी कर दिया गया. लेकिन इससे पहले पुणे के संचेती अस्पताल में नौ दिन (31 दिसंबर 2011 से 8 जनवरी 2012 ) भरती रहे अन्ना को बीते महीने भर से जो दवाई दी जा रही थी, वह इलाज से ज्यादा बीमार करने की दिशा में किस तरह बढ़ रही थी? यह अस्पताल की ही ब्लड और यूरिन रिपोर्ट से पता चलता है. संचेती अस्पताल में 6 जनवरी को अन्ना की ब्लड / यूरिन की रिपोर्ट ( ओपीडी / आइडी नं 1201003826 ) में सब कुछ सामान्य पाया गया. लेकिन हर दिन जिन आठ दवाइयों को खाने के लिए दिया गया, उनमें स्ट्रोआइड का ओवर डोज है. 
एंटीबायोटिक की चार दवाइयां इतनी ज्यादा मात्रा में शरीर पर बुरा असर डाल सकती हैं कि किसी भी व्यक्ति को इसे खाने के बाद उठने में मुश्किल हो. असल में इलाज ऐसा क्यों किया जा रहा था, इसका जवाब तो किसी के पास नहीं है. लेकिन इस इलाज तो गुड़गांव के मेदांता में तुरंत बंद इसलिए कर दिया क्योंकि यह सारी दवाइयां अन्ना हजारे के शरीर में धीमे जहर का काम कर रही थीं. खास बात यह भी है कि संचेती अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में डॉ कांति लाल संचेती के बेटे डॉ पराग लाल संचेती के हस्ताक्षर के साथ यह लिखा गया कि एक महीने यानी 8 फ़रवरी तक अन्ना को सिर्फ़ आराम ही करना है. कोई काम नहीं करना है. खासकर अस्पताल छोड़ते वक्त 8 जनवरी को अन्ना हजारे को संचेती अस्पताल के डॉक्टर ने यह भी कहा कि लोगों से मिलना-जुलना बंद रखें. लेकिन अन्ना का इलाज बदला और अन्ना दो दिन में कैसे ठीक हो गये ?
क्यों अन्ना ने जारी किया बयान
पेट से लेकर मुंह, हाथ, पांव की सूजन खत्म हुई, तो आज ( 31 जनवरी ) सुबह 10 बजे पुणे से डॉ पराग संचेती अन्ना से मिलने गुड़गांव के मेंदाता अस्पताल आ पहुंचे. करीब एक घंटे तक जब उन्होंने आइसीयू के कमरे में अकेले बैठ कर अपने संबंधों का रोना रोया और पुणे से लेकर मुंबई तक संचेती अस्पताल पर लगते दाग का दर्द बताया. अपने पिता कांति लाल संचेती को पद्म विभूषण सम्मान पर उठती अंगुलियों का जिक्र किया, तो अन्ना ने उन्हें माफ़ करने के अंदाज में सब-कुछ भूल जाने को कहा. तो डॉ पराग संचेती ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक अन्ना अपने हाथ से लिख कर कोई बयान जारी नहीं करते, तब तक उन्हें मुश्किल होगी. ऐसे में अन्ना ने लिखा, ‘मुझे नहीं लगता कि दवाइयां गलत नीयत से दी गयी थी. शायद मेरा शरीर उसे बरदाश्त नहीं कर पाया. और डॉ संचेती के पद्म विभूषण को मेरे इलाज से जोड़ना गलत है.’
बड़ा सवाल
अन्ना का यह बयान कुछ दूसरे संकेत भी देता है. क्योंकि अन्ना पहली बार गुड़गांव के अस्पताल में बिना किसी रालेगण के सहायक के हैं. जबकि बीते एक बरसके दौरान जंतर-मंतर हो या रामलिला मैदान या फ़िर मुंबई. उनके साथ रालेगण के उनके सहायक सुरेश पठारे हमेशा रहे. लेकिन इसी दौर में अन्ना के करीबियों के पास ब्लैक बेरी और एप्पल के आइ फ़ोन समेत बहतेरी ऐसी सुविधाएं आ गयीं, जिसकी कीमत लाख रुपये से ज्यादा की है. यह सुविधा रालेगण में अन्ना को घेरे कई सहायकों के पास है. और अन्ना के रालेगण में रहने के दौरान पुणे के व्यवसायी की यह पैठ सबसे ज्यादा हो गयी. जबकि इस दौर में पुणे से लेकर मुंबई तक में चर्चा यही है कि पुणे के जिस व्यवसायी को पद्मश्री और जिस डॉक्टर को पद्म विभूषण मिला, उनके नाम इससे पहले पुणे के सांसद सुरेश कलमाड़ी ने प्रस्तावित किया था, लेकिन कलमाड़ी के दागदार होने के बाद इनकी फ़ाइल बंद कर दी गयी, लेकिन जैसे ही अन्ना का संबंध इनसे जुड़ा, तो सरकारी चौसर पर दोनों ने अपने अपने संबंधों की सौदेबाजी के पांसे फ़ेंक कर सम्मान पा लिये.

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